निगम के चार राजस्व कर्मचारियों पर गिर सकती है निलंबन की गाज

  • पूर्व राजस्व अधिकारी को 30 हज़ार दिया था घूस – मछली व्यापारी
  • सामान्य सभा में उठने के बाद ही महापौर को क्यों याद आती है कार्यवाही – रामाश्रय सिंह
  • काउंटर पर रसीद काटने वाले कर्मचारियों द्वारा नहीं दी गयी मामले की जानकारी – प्रभारी राजस्व अधिकारी
  • अपना ठीकरा महापौर पर फोड़ते राजस्व सभापति ने झाड़ा अपना पल्ला
  • मछली व्यापारी के विरुद्ध निगम ने दिया 4.21 लाख के अर्थदंड का नोटिस

जगदलपुर. संजय मार्केट के मछली गोदाम में अवैध तरीके से काबिज एक व्यापारी का मामला विगत सामान्य सभा में उठने, समिति गठन, समिति की रिपोर्ट व उसके बाद राजस्व विभाग द्वारा की गयी कार्यवाही के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में काफी उथल-पुथल का माहौल बना हुआ है. ताजातरीन जानकारी के मुताबिक उक्त मामले में निगम को राजस्व को क्षति पहुँचाने वाले निगम के राजस्व विभाग के चार कर्मचारियों पर निलंबन की गाज गिर सकती है.

विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संजय मार्केट में निगम की 16 दुकानें थी, जिसे दिसंबर 2014 से दिसंबर 2017 तक उत्तम डे नामक मछली व्यापारी द्वारा कब्ज़ा कर लिया गया था. उक्त दुकानों में अवैध कब्जे की बात जब पूर्व सामान्य सभा में उठी तो उसके बाद निगम अध्यक्ष शेषनारायण तिवारी द्वारा टीम गठित किया गया, जिसके रिपोर्ट के आधार पर पिछले माह राजस्व विभाग द्वारा कब्जे को हटाया गया था व प्रभारी राजस्व अधिकारी राकेश यादव, स.रा.नि. हरिद्वार मिश्रा, स.रा.नि. लाल साहेब त्रिपाठी और रणधीर ठाकुर को निगम आयुक्त एके हालदार निलंबित करने की तैयारी में थे. इसके बाद उत्तम डे ने कुछ दिन पूर्व शपथपूर्वक निगम में शिकायत की है कि राजस्व विभाग के निलंबित राजस्व अधिकारी विनय श्रीवास्तव और दुकानों से राजस्व वसूली करने वाले कर्मचारी चंदन प्रजापति को दुकानों के पोजेशन हेतु घूस स्वरुप 30 हज़ार रुपये दिया गया था, जिसके बाद भी आर्डर नहीं निकाला गया. इस पर अपने पैसों को वापस लेने का तगादा करने पर उसे उक्त अधिकारी घुमाते रहे और न ही किसी प्रकार का रसीद दिया. इस बीच विनय श्रीवास्तव व चंदन प्रजापति को एक अन्य मामले में निलंबित कर दिया गया.

उक्त मामले में पार्षद रामाश्रय सिंह ने महापौर जतिन जायसवाल पर सीधा वार करते हुए कहा है कि इतने माह से महापौर क्या कर रहे थे, लगभग तीन वर्ष हुए कांग्रेस की निगम सरकार को साल 2014 के इस मामले को सामान्य सभा में उठाये जाने के बाद कार्यवाही किया जाना याद आता है. उत्तम डे द्वारा दिए गए शपथ के बाद भी जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर दी जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान के चारों राजस्व कर्मचारी दोषी नहीं है, पूर्व के निलंबित कर्मचारी के समय का मामला है. किन्तु, अभी के कर्मचारियों को भी लगभग एक वर्ष होने के बावजूद भी इस मामले में ध्यान क्यों नहीं दिया गया और ऍफ़आईआर अभी तक क्यों नहीं हुई?

इधर अपना पक्ष रखते हुए प्रभारी राजस्व अधिकारी राकेश यादव ने बताया कि यह मामला पूर्व के आरओ विनय श्रीवास्तव के समय का है. उस वक़्त क्या हुआ था इसकी जानकारी उन्हें नहीं है. फाइल देखने के बाद मछली व्यापारी उत्तम डे को सितम्बर 2014 से दिसंबर 2017 (39 माह 13 दिन) तक का 4 लाख 21 हज़ार 376 रुपयों का अर्थदंड लगाया गया है, जिसका नोटिस भी कुछ दिन पूर्व भेजा जा चुका है. इसके अलावा श्री यादव का कहना था कि काउंटर पर रसीद काटने वाले कर्मचारियों द्वारा पूर्व में कोई जानकारी नहीं दी गयी थी इसलिए विलम्ब हुआ.

इस मामले में अधिक जानकारी लेने हेतु राजस्व सभापति अब्दुल रशीद से संपर्क किया गया तो उन्होंने अपना ठीकरा महापौर पर फोड़ते हुए कहा कि चूँकि यह 4-5 वर्ष पुराना मामला है, इस विषय पर मुझे कोई जानकारी नहीं है, जो बयान देना है महापौर देंगे और इस मामले में कार्यवाही के लिए कुछ बचा ही नहीं है.

यहाँ यह कहना लाजमी होगा की राजस्व सभापति द्वारा इतने बड़े मामले से अपना पल्ला झाड़ लेना व पूर्व के कार्यकाल का बहाना करना साफ़ इंगित करता है की उन्हें न तो राजस्व विभाग से कोई सरोकार है और न ही अन्य किसी मामले से. दबे स्वर में कुछ राजस्व कर्मचारियों ने यह भी बताया कि उक्त राजस्व सभापति, आम सभा या अन्य बैठकों में कर्मचारियों की परेशानियों और बातों को रखने से भी लड़खड़ाते हैं.

विदित हो की खबर लिखे जाने तक निगम आयुक्त रायपुर के दौरे पर थे और संभवतः वे गुरुवार को इस मामले में कार्यवाही करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, चूँकि उक्त कर्मचारी राजनैतिक गलियारों में अपनी घुसपैठ रखते हैं, आयुक्त उच्च स्तर पर इस मामले में निलंबन की कार्यवाही की अनुमति लेने के उद्देश्य से राजधानी गए हुए थे और निलंबन के लिए उच्च स्तर से हरी झंडी भी मिल चुकी है.

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