शहरयार खान की नियत थी साफ़, गांववालों और पीड़िता को वाहन से चाहता था कुचलना – प्रत्यक्षदर्शी

  • पीड़िता को न्याय मिलने की प्रक्रिया अब तक नहीं हुई शुरू
  • दो माह पश्चात भी पुलिस ने पेश नहीं किया चालान, शायद 90 दिन पूर्ण होने के इंतज़ार में है पुलिस
  • शहरयार के वाहन में बैठी दोनों युवतियों ने झूठे रेप केस में एक युवक को फ़साने की दी थी धमकी

जगदलपुर. विगत 13 फरवरी को ग्राम बिलोरी में राधा नामक महिला के साथ हुए दर्दनाक हादसे में जहाँ उसका पैर कटकर पूरी तरह से अलग हो गया वहीं दूसरी ओर मामले में संलिप्त आरोपी शहरयार खान को मुचलके पर जमानत मिल चुकी है. इस घटना को आज बराबर दो माह हो चुके हैं और पुलिस द्वारा चालान पेश नहीं किये जाने से पीड़िता को न्याय मिलने की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है.

मामले के प्रत्यक्षदर्शी बिलोरी निवासी बिरलेख बघेल का कहना है की शहरयार खान उर्फ़ शानू द्वारा सर्वप्रथम एक साइकिल चालक को तेज़ रफ़्तार से ठोकर मारी गयी थी जिसके पश्चात गांववालों से उसका विवाद गरमा गया. उसके वाहन से दो युवतियां बाहर आयीं और वे सभी नशे के हालत में थे. नशे की हालत में ग्राम के ही जयकिशन नामक युवक को मारने का प्रयास कर रहे थे. भीड़ इसी बीच बढ़ता गया. हाथापाई की नौबत आने पर अपने वाहन पर शहरयार बैठ कर उसे गाँववालों को दबाने, डराने और मारने की नियत से आगे-पीछे घुमाने लगा. इसी बीच वाहन को पीछे करते समय डिवाईडर पर खड़ी डरी सहमी महिला राधा को ठोकर मार दिया और उसका पैर पूरी तरह कटकर अलग हो गया. बिरलेख ने बताया की लापरवाही पूर्वक वाहन चलाते समय शहरयार की नियत साफ़ थी की वह पीड़िता और वहाँ एकत्रित गांववालों को वाहन से कुचल देना चाहता था. प्रत्यक्षदर्शी ने बताया की यह घटना आधा से एक घंटे तक चला. इस बीच उसने यह भी बताया की जो दो युवतियां वाहन से नीचे उतरे थे वे ग्राम के ही जयकिशन नामक युवक को झूठे रेप के केस में फ़साने की धमकी भी दे रहे थे साथ ही साथ शहरयार सभी को धमकी दे रहा था की घटना स्थल से हट जाओ अन्यथा सभी को वाहन से कुचल दूंगा.

पीड़िता के पति दुर्जन नाग ने बताया की शहरयार ने जानबूझ कर मेरी पत्नी को बारम्बार अपने वाहन को आगे-पीछे करके मारा था. एक सवाल के जवाब में उसने बताया की हम अपने बयान से पलट नहीं रहे हैं, शहरयार को अपने किये की सजा मिलनी चाहिए. पुलिस की लेटलतीफी के सवाल पर दुर्जन ने बताया की शायद पुलिस आरोपी पक्ष से पैसे ले चुकी है इसलिए मामले को दबाने और कमजोर करने की कोशिश की जा रही है.

इस पुरे मामले में क्षेत्र के एसडीओपी निमेश बरिया का कहना है की पुलिस ने शहरयार के खिलाफ धारा 279, 337 और 338 के तहत मामला पंजीबद्ध किया है. घटना में प्रयुक्त वाहन जप्त कर ली गयी है और न्यायालय से वाहन को छोड़ दिया गया है. आरोपी जमानत मुचलका पर रिहा हो चूका है. एक सवाल पर उन्होंने धीमे स्वर में बताया की पुलिस द्वारा अपना कार्य किया गया है. चालान तैयार है, न्यायालय में पेश होना बाकी है.

इधर पीड़िता पक्ष के वकील पवन राजपूत ने बताया की आरोपी पक्ष जबरदस्ती प्रकरण को दुसरे रास्ते में ले जाने का प्रयास कर रही है. यह अपराध जानबूझकर जान से मारने की नियत से किया गया है. परिस्तिथियाँ स्पष्ट तौर पर इंगित कर रहीं है की यह मामला आकस्मिक दुर्घटना का न होकर साशय उपहति कारित करने का है लेकिन पुलिस ने अपनी जांच इस नजरिये से संभवतः नहीं की है. श्री राजपूत ने बताया की शहरयार एक आपराधिक चरित्र का व्यक्ति है और जब उसे इस बात का संज्ञान था की गाँववाले उसकी गाड़ी को रोके थे उसके पश्चात कम से कम घटना को अंजाम नहीं देना चाहिए था. वह घटना से भाग सकता था, किन्तु उसने ऐसा नहीं किया अपितु घटना को और भी दर्दनाक और भयावह स्तिथि तक ले गया, इससे उसकी आपराधिक मानसिकता झलकती है.

विदित हो की इस घटना को आज पुरे दो माह हो चुके हैं. इस बीच पीड़िता की यथासंभव मदद के लिए किसी भी जनप्रतिनिधि अथवा मानवाधिकार संगठनों का सामने नहीं आना समझ से परे है. इधर शहर में चर्चा का बाज़ार इस बात को लेकर गर्म है की आरोपी के पिता का एक राजनितिक दल से सम्बन्ध होने के चलते सभी एक ही थाली के चट्टे-बट्टे बने हुए हैं.

त्रुटिसुधार: विडियो में प्रत्यक्षदर्शी का नाम बिरलेख बघेल है, न की बिरलज नाग.

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