नक्सलियों ने आधार इलाकों में रिपोर्टिंग के लिये पत्रकारों को घोषित किया स्वतन्त्र

बीजापुर(शेख इस्लामुद्दीन) विधानसभा चुनाव से ठीक दो सप्ताह पहले चुनाव का बहिष्कार करने वाले माओवादियों के सूर अब बदल गए हैं.कस्बाई इलाकों में लगातार चुनाव बहिष्कार संबंधी पर्चे और बैनर फेंकने वाले माओवादियों ने पत्रकारों के लिए जारी एक प्रेस नोट में चुनाव के दौरान अंदरूनी इलाकों में जाकर चुनाव बहिष्कार संबंधी रिपोर्टिंग के लिए खुद के द्वारा लगाए गए बंदिशो को हटा दिया है और अंदरूनी इलाकों में जाकर स्वेच्छा से बेखौफ होकर इलाकों का दौरा कर रिपोर्टिंग करने की अपील की है। साथ ही यह भी लिखा है कि सशस्त्र बलों की संगीनों के साए में चुनाव को जबरन संपन्न कराने की सरकारी कोशिशो का पर्दाफाश करें,संघर्षरत् इलाकों की सच्चाई को जनता के सामने लाने प्रयासरत् पत्रकारों को अंदरूनी इलाकों का दौरा करने से रोकने के लिए किए गए आतंकी प्रयासों को याद दिलाना इस संदर्भ में गैर वाजिब नहीं होगा,19 अक्टूबर को माओवादियों की दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी द्वारा प्रिंट व इलेक्टॉनिक मीडिया के लिए जारी एक प्रेस नोट में माओवादियों ने लिखा है कि भाजपा सरकार जन पक्षधर पत्रकारों से खफा रही है और उन पर लगातार हमलें करवाती रही हैं। यही नहीं बल्कि हत्याएं व धमकियां भी सरकार और पुलिस द्वारा पत्रकारों को लगातार दी जाती रही है। माओवादियों द्वारा जारी प्रेसनोट में माओवादियों ने लिखा है कि उनकी पार्टी यह मानती है कि चुनाव बहिष्कार एक लोकतांत्रिक अधिकार है। जनता के इस अधिकार को सरकारें व पुलिस प्रशासन नहीं मानती है और जबरन इसमें शामिल करने की कोशिश करती हैं और कुछ जनविरोधी पत्रकारों के जरिए सरकार अखबारों में इस आशय की झूठी रिपोर्टिंग प्रकाशित करवाती है कि वोट डालने पर माओवादी उंगली काट देते हैं। जबकि बांदा व झांसी में आम चुनावों के दौरान भाजपा को वोट ना देने के कारण एक-एक दलित की नृसंश हत्या की गई थी.माओवादियों ने उनके आधार इलाकों में पत्रकारों के रिपोर्टिंग और प्रवेश की बंदिशो को हटाते हुए स्वेच्छा से बेखौफ होकर चुनाव बहिष्कार की रिपोर्टिंग करने की अपील की है

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