गोपुरम के आकार में रोज शाम सजते हैं पुष्प, गोल घेरे में महिलाएं लोकगीत पर करती है परिक्रमा

  •  बीजापुर में दिख रही तेलगु संस्कृति की झलक, महागौरी की स्तुति में बतुकम्मा उत्सव
बीजापुर(शेख इस्लामुद्दीन )शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर बीजापुर जिले में सीमावर्ती प्रांत तेलंगाना में प्रचलित बतुकम्मा उत्सव की झलक देखने को मिल रही है.दरअसल तेलगु समाज में प्रचलित बतुकम्मा देवी स्तुति का उत्सव है.बीजापुर, मद्देड़, रूद्रारम , भोपालपट्नम में बसे तेलगू भाषीय परिवारों के द्वारा प्रतिवर्ष नवरात्र के दौरान पूरे उल्लास के साथ बतुकम्मा का आयोजन किया जाता है.उत्सव में भक्तिभाव और उल्लास के साथ महिलाएं, युवतियां सम्मिलित होती है. और लोकगीतों पर नाचकर गौरी की उपासना करती है. इस दौरान मौसमी पुश्पों के ढेर मुख्य आकर्षक का केंद्र होते हैं, जिसे सात संकेंद्रित परतों में विभिन्न अनोखे मौसमी फूलों से मंदिर के गोपुरम के आकार से सजाया जाता है. उनमें से ज्यादातर पुष्प औषधीय गुण वाले होते हैं.भोपालपट्नम की जया चिड़ेम के अनुसार तेलगू भाषा में बतुक का मतलब ‘जीवन’ होता है और  अम्मा का अर्थ ‘मां’ होता है. इस तरह बतुकम्मा का अर्थ है देवी मां का जागना,जीवन दायित्री देवी महागौरी को बतुकम्मा के रूप में पूजा जाता है। श्रीमती चिड़ेम के अनुसार यह नवरात्र से एक दिन पूर्व महालया के दिन शुरू होता है और दशहरा से दो दिन पहले दुर्गा अष्टमी पर सदुदला बतुकम्मा त्योहार पर समाप्त होता है.नौ दिनों तक रोज शाम को महिलाएं और विशेष रूप से बालिकाएं अपनी बतुकम्मा के साथ अपने इलाके के खुले क्षेत्रों में इकट्ठा होती है. वे बतुकम्मा के चारों ओर एक गोले में लोक गीत गाते हुए , ताली बजाकर चारों ओर परिक्रमा करती है.

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