अंदरूनी इलाके से ग्रामीणों की चुप्पी

बीजापुर / ( शेख ईस्लामुद्दीन) विधान सभा चुनाव की घोषणा हुई है तब से बीजापुर में नेता इसलिए नहीं घुस पा रहें है क्योंकि उनके खिलाफ एक बड़ा फरमान जारी हुआ है । और उसमें भाजपा के एक बड़े नेता को टारगेट बनाया गया है । इस बड़े नेता के खुलासे के बाद कांग्रेस और अन्य पार्टी के नेता सकते में आ चुके है। इसके अलावा प्रशासनिक स्तर पर चुनाव में प्रशासन भी दहशत में आ चुकी है । कुल मिलाकर जितनी भी फोर्स गई हुई है वह सिर्फ एक औपचारिकता को निभा रही है । पुलिस और सुरक्षा लिहाज से केन्द्रीय स्तर पर जो निर्देश आए हुए है । उसको तो निभा रहें है लेकिन इस बार के चुनाव में पुलिस प्रशासन को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है । नेता तथा पत्रकार की मौत के बाद कोई भी नेता नहीं पहुॅच पा रहा है । खबर लिखने के बाद एक नक्सली ने इस का खुलासा किया है कि पत्रकार कवरेज के लिए अंदरूनी इलाके में जा सकते है लेकिन कोई पत्रकार या नेता जाने को तैयार नहीं है । इस संर्दभ में सीधे तौर पर वन मंत्री महेश गागड़ा, भीमा मंडावी ने स्वीकार किया है कि कोई भी कार्यकत्र्ता नहीं जा रहे है । दूर दर्शन के केमरामैन और एक रिपोर्टर की मौत के बाद पूरा समीकरण बदल चुका है । स्वाभाविक है कि अब बीजापुर सुकमा, दंतेवाड़ा में जो अतिसंवेदन शील इलाके वहां पर अधिकारी भी मौन है । इस बार चुनाव में क्या नतीजा आयेगा इसकी भविष्य वाणी नहीं की जा सकती है । इन इलाकों में प्रशासन और नेताओं कि पकड़ अब खत्म हो चुकी है । इसकी जांच होनी चाहिए ।

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