आदिवासी दिवस पर समर्पित नक्सलियों का हुआ विवाह

  1. धूमधाम से निकली बारात, बड़ी संख्या में ग्रामीण हुये शामिल
  2. बारात में आई.जी. कमिश्नर, कलेक्टर, एस.पी. ने भी लिया हिस्सा

जगदलपुर. विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर दो आत्मसमर्पित नक्सली जोड़ों का विवाह सम्पन्न हुआ। बुधराम निवासी झीरम का विवाह मुंदेनार निवासी लछमनी के साथ हुआ। वहीं मानसाय निवासी कांदानार का विवाह पदमिनी के साथ ग्राम दरभा में सम्पन्न हुआ। दरभा के तहसील प्रांगण के सामने से बारात निकाली गई और दरभा हाईस्कूल में बारात के अगवानी के बाद विवाह सम्पन्न किया गया।

आत्मसमर्पित नक्सलियों के दो जोड़ों के विवाह के अवसर पर दरभा एवं आसपास के ग्रामों के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए थे। बारात में बस्तर आईजी एसआरपी कल्लूरी, कमिश्नर दिलीप वासनीकर, कलेक्टर अमित कटारिया, एसपी आरएन दाश भी विवाह के आमंत्रण में पहुंचकर शामिल हुए।
एक ओर जहां झीरम कांड से जुड़ी खौफनाक नक्सली घटना के साथ झीरम गांवों को जाना जाता है। वहीं दूसरी ओर झीरम के आत्मसमर्पित नक्सली के विवाह से झीरम का यह दूसरा अध्याय विवाह की शहनाई के साथ याद किया जाएगा, बदलते परिवेश में झीरम का बदलते स्वरूप के साथ-साथ बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की बदलती तस्वीर की गवाह आत्मसमर्पित नक्सलियों के विवाह के साथ जुड़ रहा है।

आज हुई विवाह के दौरान दुल्हा-दुल्हन बुधराम-लछमनी निवासी झीरम एवं मानसाय-पदमिनी निवासी कांदानार से मिलने पर यह स्पष्ट दिखा कि वे काफी खुश थे। उनसे चर्चा करने पर बुधराम ने बताया कि नक्सली जबरन उन्हें अपने साथ ले गये थे, जहां उनके अत्याचार से परेशान होकर आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया। बुधराम शादी के बाद देश की सेवा के लिए पुलिस की नौकरी करना चाहता है। बुधराम के साथ विवाह करने वाली लछमनी ने बताया कि वह नक्सलियों के नाट्य मंडली में शामिल थी। नक्सलियों के शारीरिक शौषण से परेशान होकर आत्मसमर्पण किया है। इसी तरह मानसाय ने बताया कि वह एक साल तक पुलिस को नक्सलियों की सूचना देता था इसके बाद पुलिस में गोपनीय सैनिक के रूप में शामिल हो गया, जिसके बाद परिवार के सदस्यों के नक्सलियों ने परेशान किया। मानसाय के साथ विवाह करने वाली पदमिनी ने बताया कि वह डेढ़ वर्ष तक नक्सलियों के राशन सहित अन्य सामान पहुंचाने का कार्य करती थी। नक्सलियों के द्वारा परेशान करने एवं शारीरिक शोषण से त्रस्त होकर इन्होंने भी आत्मसमर्पण किया है।

विवाह में शामिल होने के लिए पहुंचे झीरम गांव तथा आसापास के गांवों के दोनों परिवार के सदस्य एवं ग्रामीणों में से सोनारू, हिड़मा, मासू, सुकमती, मासो, फगनी, लक्ष्मी, से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि विवाह से गांव में अच्छा वातावरण बनेगा तथा नक्सलियों से जुड़े लोग भी मुख्यधारा से जुड़ेगे। इन्होंने बताया कि झीरम में कैम्प के खुलने के बाद सुरक्षा एवं बुनियादी सुविधाएं ग्रामीणों तक पहुंच रही है। जिसका लाभ ग्रामीणों को हो रहा है। झीरम गावं के 12 नक्सलियों ने अब तक आत्मसमर्पण कर दिया है, जिसमें से अधिकतर लोग गांव में ही रह रहे हैं।

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