खुले में ग्रामीण बना रहे हैं भोजन – मेकाज प्रबंधन की लापरवाही से ग्रामीण परेशान

जगदलपुर (राकेेश पाण्डे). मेकाज सह महारानी अस्पताल हमेशा ही अव्यवस्थाओं के लिए सुर्खियों में रहता है. मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बावजूद मेकाज सह महारानी अस्पताल आज भी रेफर सेंटर का कार्य ही कर रहे है. यह बस्तर का दुर्भाग्य है कि मेकाज की स्थापना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के लिए जिसे वरदान साबित होना था, इसमें कोई परिवर्तन नहीं देखा जा रहा है. जिला अस्पताल के दौर में बने ग्रामीणों को रूक ने एवं भोजन बनाने के लिए बनाया गया विश्राम भवन के स्थान पर रेडक्रास का मेडिकल स्टोर और बंद पड़ा केंटीन का निर्माण कर दिया गया. जिसके बाद दूर – दराज बस्तर संभाग के ग्रामीणों को मेकाज सह महारानी अस्पताल में रूकने तथा भोजन बनाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं होने से इन दिनों खुले में ग्रामीण, ग्रामीणों के परिजन भोजन बनाने के लिए विवश है. बस्तर संभाग के ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचने वाले मरीजों के लिए रूकने एवं भोजन बनाने के लिए आश्रय आवश्यक था, जिसे पूर्व में इसी सोच के आधार पर बनाया गया था. मरीजों के परीजनों के विश्राम भवन को तोडक़र अन्य भवन बनाने के बाद से खुले में भोजन बनाने के लिए मजबूर है ग्रामीणों के परिजन.

उल्लेखनीय है कि संभाग मुख्यालय जगदलपुर मेकाज सह महारानी अस्पताल में बस्तर संभाग के सैकड़ों ग्रामीण तथा मरीज रोजाना अच्छे उपचार की आस में यहां पहुंचते हैं. जिसे ध्यान में रखते हुए जिला महारानी अस्पताल के दौर में महारानी अस्पताल के प्रांगण के अंदर विश्राम भवन का निर्माण किया गया था जहाँ संभाग के गरीब ग्रामीण आश्रय लेते थे तथा इस विश्राम भवन में भोजन बनाकर परिजनों तथा मरीज की तीमारदारी किया करते थे. लेकिन जैसे – जैसे महारानी अस्पताल सह मेकाज की स्थापना के बाद इसका विस्तार किया गया. इसके साथ ही प्रांगण में निर्मित विश्राम भवन को तोडक़र उसके स्थान पर रेडक्रास मेडिकल स्टोर और बंद पड़ा केंटीन लोगों की व्यवस्था के लिए बनाया गया. यह आश्चर्य का विषय है कि जिस विश्राम भवन को तोडक़र केंटीन का निर्माण किया गया वह बस्तर संभाग के गरीब ग्रामीणों के लिए उपयोग में नहीं आ रहा है. यह सर्वविधित है कि बस्तर के ग्रामीण अंचल से पहुंचने वाले ग्रामीण गरीब होते हैं. जिसके चलते वे केंटीन या होटलों का उपयोग करने में सक्षम नहीं होते हैं. जिसे ध्यान में रखकर विश्राम भवन बनाया गया था विश्राम भवन के तोड़े जाने के बाद बस्तर के ग्रामीण जनता खुले में भोजन बनाने के लिए मजबूर है. मेकाज सह महारानी अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का आलम यह है कि तोड़े गये विश्राम भवन को अस्थाई तौर पर महारानी अस्पताल के पुराने भवन के सामने शेड़ बनाकर की गई थी. जिसे भी तोड़ा गया है और जिस शेड़ के नीचे ग्रामीण मरीजों के परिजन भोजन बनाते थे उसकी सीट भी निकाल दी गई है. ऐसी स्थति में परिजनों को खुले में ही भोजन बनाने एवं रूकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. जिस गरीब ग्रामीण जनता के स्वास्थ्य सुविधा के लिए शासन के द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सुविधा उपलब्ध करने का दावा सरकार करती है इसके ठीक वितरीत मेकाज सह महारानी अस्पताल प्रबंधन बस्तर संभाग के गरीब ग्रामीण की जनता की सुविधा के लिए बनाए गये व्यवस्था को तोडक़र उन्हें खुले आसमान के नीचे कडक़ड़ाती ठण्ड में रहने के लिए मजबूर कर रही है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *