बड़ी खबर: ग्रीन कार्ड बनवाने खुलेआम लुट रहे शहरवासी व ग्रामीण, प्रशासन और अधिकारी मौन

  • लेबर अधिकारी ने कहा, अधिकतम 50 रुपये ही ले सकते हैं शुल्क
  • अधिकतम राशि से दोगुना राशि ले, कर्मचारी कर रहे बंदरबांट
  • सवाल का जवाब तो दिए नहीं वीएलई, उल्टा बंद कर दिया काउंटर
  • आनन-फानन में अपना ठीकरा दीगरों पर फोड़ते रहे अधिकारी; कर्मचारी
  • गणित में कमजोर हैं लोक सेवा केंद्र के एजेंट, लिया प्रशांत का नाम जो दे चुके हैं महीनों पूर्व अपना इस्तीफा
  • ग्रीन कार्ड संबंधी कार्य में चिप्स का नहीं है कोई दखल – ई-जिला प्रबंधक

जगदलपुर. कलेक्टर कार्यालय के कॉम्पोजिट भवन में स्थित लेबर शाखा द्वारा संचालित लोक सेवा केंद्र अंतर्गत शहरवासियों और ग्रामीणों का बनाये जा रहे ग्रीन कार्ड (लेबर कार्ड) में यहाँ बैठे ऑपरेटर व वीएलई खुलेआम लूट मचा रखे हैं, जिससे आवेदकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें ये ऑपरेटर अपनी मर्जी से मनमाना दामों पर ग्रीन कार्ड बनाने के एवज में पैसे ले रहे हैं साथ ही पूछे जाने पर बदतमीजी करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं और इनकी सुध लेने वाला अब तक कोई नहीं है. इधर मीडिया को देख यहाँ बैठे वीएलई समेत अन्य ऑपरेटरों की बोलती ही बंद हो गई और अपना ठीकरा दूसरों पर फोड़ते नज़र आये. इन सब में चिंतनीय विषय तो यह है की आनन-फानन में एक एजेंट ने उस अधिकारी पर अपना ठीकरा फोड़ दिया जिसे नौकरी से इस्तीफा दिए हुए महीनों बीत चुके हैं.

लेबर अधिकारी ने कहा, अधिकतम 50 रुपये ही ले सकते हैं शुल्क

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ महीनों से कलेक्टर कार्यालय के कॉम्पोजिट भवन में लेबरों का ग्रीन कार्ड, शासन के योजनानुसार बनायी जा रही है, जिसके तहत इन लेबरों को योजना का लाभ मिल सके. यह कार्य यहाँ स्थित लोक सेवा केंद्र में संचालित होता है जिसमें आवश्यक दस्तावेज़ देकर आवेदक अपना कार्ड बना सकते हैं. लेबर अधिकारी पीके बिचपुरिया के अनुसार, उक्त कार्ड को बनाने के लिए न्यूनतम दर लगभग 30-35 रुपये है, दस्तावेजों के स्कैन के पश्चात यह राशि बढ़कर अधिकतम 50 रुपये तक हो जाती है.

अधिकतम राशि से दोगुना राशि ले, कर्मचारी कर रहे बंदरबांट

नियमों को ताक में रख केंद्र में बैठे कर्मचारी इससे बिलकुल उलट और दोगुना राशि सौ रुपये ले रहे हैं. सोमवार को जब निचोड़ के प्रतिनिधि ने यहाँ दस्तक दी तो यहाँ का मंजर देखने वाला था, सभी कर्मचारियों ने आपसी इशारों और चर्चा से मीडिया के सामने रकम नहीं लेने की सहमती कर ली. लेकिन किये गए स्टिंग ऑपरेशन और आवेदकों के बयान से यह स्पष्ट हो गया की इस बंदरबांट में दाल में कुछ नहीं वरन पूरी दाल ही काली है. हालाँकि, पूरा मामला उच्च स्तरीय जांच का विषय है.

सवाल का जवाब तो दिए नहीं वीएलई, उल्टा बंद कर दिया काउंटर

लगभग दो घंटे चली स्टिंग और बयानों के सिलसिले में कक्ष में बैठे वीएलई शशिकांत यादव मीडिया और जनता के सवालों के जवाब देने के बजाय पहले तो चुप्पी साधे बैठे रहे उसके बाद वे बिफर उठे और मीडिया प्रतिनिधि को ही कार्यालय से बाहर जाने की नसीहत दे डाली, इसके बाद अपना गुस्सा जनता पर निकालते हुए उनके आवेदनों को काउंटर से ही वापस कर दिया और काउंटर बंद कर दिया गया, जिससे यह साफ़ जाहिर हो रहा था कि इन कर्मचारियों को केवल अपने जेबें गर्म करने की पड़ी है, राज्य और केंद्र स्तर की योजनाओं और जनता की समस्यों से इन्हें कोई सरोकार नहीं है.

आनन-फानन में अपना ठीकरा दीगरों पर फोड़ते रहे अन्य कर्मचारी

कक्ष में आधार कार्ड संबंधी कार्य कर रहे जी उद्भव से जब सवाल किये गए तो उन्होंने आनन-फानन में अपनी गलितियों को छुपाने अपना ठीकरा ई-जिला प्रबंधक रविंदर सिंह पर फोड़ दिया और किसी भी सवाल के जवाब को उन्ही से लेने की नसीहत दी. मालूम हो कि श्री उद्भव द्वारा बगैर किसी आईडी के कार्य किये जाने और इनकी कारगुजारियों से सम्बंधित खबर, निचोड़ ने प्रमुखता से पूर्व में भी प्रकाशित की है.

गणित में कमजोर हैं लोक सेवा केंद्र के एजेंट, लिया प्रशांत का नाम जो दे चुके हैं महीनों पूर्व अपना इस्तीफा

इसके बाद लोक सेवा केंद्र के एजेंट अक्षय यदु से जानकारी ली गयी तो उन्होंने बताया कि कार्ड बनाने केवल 70 रुपये ही लिया जा रहा है, स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने आनन-फानन में बगैर गणित का प्रयोग करते हुए बता दिया की एक आवेदक द्वारा 8-10 पृष्ठ के दस्तावेज़ प्रदान किये जाते हैं, प्रति पृष्ठ 5 रुपये की दर से शुल्क लिया जाता है. अब कुल राशि 10 पृष्ठों की कितनी होगी, ये आप ही गुणा कर लीजिये. श्री यदु द्वारा यह भी बताया गया कि पूर्व के अधिकारी प्रशांत यादव के कहे जाने पर 100 रुपए की राशि ली जा रही है, अब सच्चाई क्या है यह किसी को नहीं मालूम. साथ ही श्री यदु ने बताया कि उन्हें सौ रुपये लेने का आदेश तत्कालीन अधिकारी प्रशांत यादव द्वारा दिया गया है. मालूम हो कि श्री यादव कई महीनों पूर्व विभाग की कार्यशैली से त्रस्त हो अपना इस्तीफा दे चुके हैं. इस्तीफा दे चुके अधिकारी के आदेशानुसार आज पर्यंत तक राशि लिए जाने का सिलसिला कई सवालों को जन्म दे रहा है.

ग्रीन कार्ड संबंधी कार्य में चिप्स का नहीं है कोई दखल – ई-जिला प्रबंधक

पूरे मामले में चिप्स के ई-जिला प्रबंधक रविंदर सिंह से जब चर्चा की गयी तो अन्य कर्मचारियों की ही तरह अपना ठीकरा दूसरों पर फोड़ते बताया कि उक्त कक्ष में होने वाले ग्रीन कार्ड संबंधी कार्य में चिप्स का कोई दखल नहीं है, यह कार्य लेबर विभाग का है. हालाँकि, उन्होंने इस बात की जानकारी नहीं दी की जब उनका कोई दखल नहीं है तो फिर मीडिया के पहुँचते ही वहां क्या करने पहुंचे थे और वीएलई से क्या चर्चा कर रहे थे?

इधर कोई भी सहर्ष ही अंदाजा लगा सकता है की लोक सेवा केंद्र के एजेंट और ई-जिला प्रबंधक के बयान में काफी दूरियां नजर आ रही है, साथ ही इन सब के बीच जनता पिस रही है. बावजूद, प्रशासन की आँख में खुले तौर पर धूल झोंकते हुए ये कर्मचारी और अधिकारी मनमाना कार्यशैली का परिचय दे रहे हैं और इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है.

टीप: नीचे दिए विडियो में है पूर्ण खुलासा, देखें क्या कहते हैं बसंती, रेखा सहित अन्य आवेदक…

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