किसानों की चाल ने राजनीतिक दलों की नींद उठाई

किसानों के नई सरकार बनने के बाद धान बेचने का फैसला किसकों पहुंचायेगा लाभ


जगदलपुर। धान की खरीदी शुरू हो जाने के बाद भी किसान धान बेचने लैम्प्स नही आ रहे है। किसान राज्य में नई सरकार बनने के बाद अपने धान बेचने की बात कह रहे है, निश्चित ही आगामी विधानसभा चुनाव में किसान का मुद्दा बेहद ही अहम हो गया है, क्योकि जिस तरह से किसान धान बेचने के लिए मंडी नही आ रहे है वह साबित करता है कि किसान का चुनाव के बाद बेहत्तर मुल्य मिलने की उम्मीद लगाये बैठे है, सभी राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में किसानों को ध्यान रखा गया है इसलिए किसान किसके घोषणा पत्र पर विश्वास करते हुए धान बेचने के लिए मंडी नही आ रहे है यह ऐसा सवाल है जिसका जबाब 11 दिसंबर को मतगणना के दिन ही मालूम पड़ेगा, लेकिन राजनीतिक जानकार अपने अपने हिसाब से किसानो के इस निर्णय की समीक्षा कर रहे है कि नई सरकार बनने के बाद ही वह धान की बिक्री करेंगे। इस विधानसभा चुनाव में किसानों ने राजनैतिक पार्टियो के सारे राजनीतिक समीकरण को बिगाड़ के रख दिया है। किसानों द्वारा नई सरकार बनने के बाद धान बेचने की बातों ने कई राजनीतिक दलों के नींद उठा कर रख दी है। उल्लेखनीय है कि राजनीतिक दल किसानों के मुद्दो केा लेकर लम्बे समय से राजनीति करते आ रहे है लेकिन चुनाव के साथ राज्य के किसानों ने नई सरकार बनने के बाद धान बेचने का जो फैसला लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में नया ट्वििस्ट ला दिया है। यह ट््िविस्ट का किसकों लाभ मिलेगा और किसकों नुक्सान यह ऐसा सवाल है जिसका जबाब कौन बनेगा करोड़पति के होस्ट के पास भी नही है।

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