चुनौतियां है अबूझमाड़ में

अबूझमाड़ (करीम) बस्तर संभाग का नारायणपुर विधान सभा क्षेत्र का अबूझमाड़ विश्व में अपनी दुर्गमता और अबूझेपन के लिए अपनी अलग पहचान रखता है । शायद इसीलिए अबूझमाड़ियों से मतदान करवाने चुनाव आयोग को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कई हजार वर्ग किलो मीटर मे ंफैले इस अबूझमाड़ में करीब 15 हजार मतदाता सूची में हैं । औसतन 5 से 6 हजार ही वोट डाल पाते हैं। इनकी सुरक्षा के लिए 15 हजार से ज्यादा सशस्त्र जवान तैनात किए जा चुके हैं। इन जवानों को जंहा 20 से 30 किलो मीटर की खतरनाक डगर तय करनी पड़़ती है , वहीं इच्छुक मतदाता को भी कम से कम 8 से 10 किलो मीटर का सफर जान हथेली पर रख कर तय करना होगा। आयोग ने 29 से ज्यादा मतदान केन्द्र बनाए हैं। आज यंहा चुनाव आयोग को पांच से 6 हजार मत डलवाने के लिए 15 हजार से अधिक जवान तैेनात करने पड़ रहें हैं । यानि हर मतदाता के लिए तीन जवान सशस्त्र तैनात होंगे।

महिला -अबूझमाड़

अबूझमाड़ में शांति पूर्ण चुनाव कराने क लिए दो हेलिकाॅप्टर भी तैनात किये गये हैं। ज्ञात हो कि अबूझमाड़ की दुर्गमता का आलम यह है कि यंहा यदि किसी अबुझमाड़ियों का बकरी खो जाए या उसे पीने का पानी लाने की दरकार पड़ जाए तो बिना नदी नाले या पहाड़ी पार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता। यंहा के जंगलों की सघनता इतनी है कि कुछ हिस्सों में तो खुले मौसम में भी दिन के दोपहर की धूप भी जमीन नहीं छू पाती हालात ऐसे हैं कि न हेलिकाॅप्टर लैंड कर सकते हैं और नही ंदो पहिया , चार पहिया वाहनों की मदद ली जा सकती है।

अबूझमाड़ के हालातों का जवाबदेह कोई एक नहीं है। एक ओर जंहा प्रकृति यंहा मेहरबान है वहीं आजादी के बाद बदलती सरकारों की सोच ने इसो प्राथमिकता नहीं दी । इन्ही परिस्थितियों का फायदा जिन्होने उठाया वे माओवादी या नक्सली नाम से पहचाने गए। इन पर नकेल करने के लिए आर्थिक सामाजिक परिवेश की कवायद अभिलेखों में नजर आती है पर हकीकत तब पता चलती है जब आकंड़े बोलते हैं। अबूझमाड़ संभाग बस्तर के नारायणपुर से लेकर बीजापुर के बीच इंद्रावती के पार उत्तर पूर्व से उत्तर पष्चिम दिशा तक एक लंबी पहाड़ी के रूप में बढ़ती आबादी वाला इलाका पहचाना जाता है।
अबूझमाड़ में 236 गंाव जो 39हजार वर्ग किलो मीटर मे ंफैला है। जिसमें 15 हजार 91 मतदाता हैं जिसमें 7 हजार 229 महिला मतदाता हैं। और बीजापुर दंतेवाड़ा और नारायणपुर तीन जिलो में पड़ता है। सबसे कम ग्राम बाड़पेंदा 72 मतदाता हैं जिनके लिए मतदान दल को 35 किलो मीटर पैदल जाना पड़ेगा। ग्राम कोड़े मे ं175 मतदाता के लिए मतदान दल को 52 किलो मीटर की दुरी तय करनी पड़ेगी। ग्राम कोंगेर , ग्राम मांगूर , ग्राम बारापेददा ऐसे गंाव हैं जंहा 35 से अधिक किलो मीटर दूर मतदान दल को पैेदल चलना पड़ेगा। 29 मतदान कैन्द्र में सिर्फ 6 मतदान केन्द्र ऐसे हैं , जंहा सरलता से पहुंचा जा सकता है, और 23 मतदान केन्द्र ऐसे हैं जिन इलाकों में पहुंचना एक कठिन काम है। कई गंाव ऐसे हैं जंहा मतदान दल को नाव का सहारा लेना पड़ता हैं वहीं कई गंाव ऐसे हैं जंहा मतदाताओं को नाव का सहारा लेना पड़ता है। ऐसी स्थिति में कई मतदान दल ऐसे हैं जंहा एक भी मत नहीं पड़ता।
जिला निर्वाचन अधिकारी टोपेश्वर वर्मा ने बताया कि 1लाख 73 हजार मतदाता हैं। जिनमें 90 हजार महिला मतदाता हैं। उन्होने बताया कि 37 ऐसे मतदान केन्द्र चुने गये हैंजो नक्सली दहशत क ेचलते निर्वाचन आयोग को ंस्याही नहीं लगाने के लिए आयोग को सुझाव भेजा गया है, तथा 18 मतदान कैन्द्र को स्ािानातरित किये जाने का भी प्रस्ताव है।
विदित हो कि पिछले पंद्रह सालो ंसे इस विधान सभा क्षेत्र से लगातार मंत्री केदार कश्यप जीतते हुये आये हैं । अब यंहा उनका मुकाबला कांग्रेस के प्रत्याशी चंदन कश्यप के साथ है। करीम

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