बस्तर में भ्रष्ट अधिकारियों की पौ बारह, डीपीएम फिर बहाल

  • कोंडागांव के भाजपा नेताओं की रही विशेष भूमिका
  • लाखों की हेरा फेरी के बाद मुख्यमंत्री के गृह जिले में नियुक्ति का उपहार

कोंडागांव. बस्तर में अधिकारियों को भ्रष्टाचार की खुली छुट दे दी गई है. भ्रष्टाचार करने तक ही नहीं बल्कि उसके बाद जांच और जांच में दोषी पाये जाने के बाद बर्खास्त हो चुके अधिकारियों को बहाल करने में भी प्रदेश के आला अधिकारी किसी तरह की शर्म महसूस नहीं कर रहे है. ऐसे कमाऊ अधिकारियों को बचाने में सत्तारूढ भाजपा के कुछ नेता भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे है क्योंकि भ्रष्ट अधिकारियों की बदौलत ही उनकी दुकानदारी चल रही है. इस पूरी बात को साबित करने के लिये कोंडागांव जिले का एक ताजा उदाहरण ही काफी है.

कोंडागांव जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक के पद पर आसीन नीलू धृतलहरे के खिलाफ कई गंभीर आर्थिक अनियमितताओं की शिकायत प्रदेश के जिम्मेदार अधिकारियों से की गई थी. शिकायत को आला अधिकारियों द्वारा बार बार नजर अंदाज किया जाता रहा. फिर शिकायत कर्ताओं ने हार कर महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं से शिकायत की. जब दिल्ली से जांच के आदेश जारी हुए तो प्रदेश के अधिकारियों को थोड़ा बहुत ही सही कर्तव्य बोध हुआ. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक ने नीलू धृतलहरे के मामले की जांच करवाई और जांच में पाया कि उनके द्वारा गंभीर आर्थिक अनियमितता की गई है. इसके चलते डीपीएम नीलू को 6 जनवरी 2018 को बर्खास्त कर दिया गया.

पुनः पदस्थापना पत्र
पुनः पदस्थापना पत्र

प्रदेश के बडे अधिकारियों को जिलों के भ्रष्ट अधिकारियों के प्रति कितनी सहानुभुति है, इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि लाखों रूपये के गबन के मामले में एक एफआईआर तक दर्ज नहीं करवाई गई. बहरहाल बर्खास्तगी का आदेश प्राप्त होते ही कोंडागांव में भ्रष्ट अधिकारियों के संरक्षक भाजपा नेता सक्रिय हो गये. खास तौर पर कोंडागांव की एक भाजपा नेत्री तथा कोंडागांव भाजपा संगठन के एक बड़े पदाधिकारी ने मुख्यमंत्री तक से इस बर्खास्त अधिकारी को बहाल करने की गुहार लगा डाली और फिर एक बार वही हुआ जो होना था. अत्याधिक राजनीतिक दबाव और स्वास्थ्य विभाग के एक अंत्यंत वरिष्ठ अधिकारी के विशेष स्नेह के चलते इस बर्खास्त अधिकारी को फिर से बहाल कर दिया गया है. दिनांक 1 मार्च 2018 को रायपुर में आयोजित राज्य स्वास्थ्य समिति की बैठक में बर्खास्त डीपीएम के प्रकरण को विशेष तौर पर शामिल करवाया गया इस तरह से जैसे उनके बगैर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई हो. फिर बैठक में उस अधिकारी के कृत्यों पर चर्चा हुई और पाया गया कि उनका अपराध क्षमा करने योग्य है. अधिकारी को माफ कर दिया गया और पिछले हफ्ते उन्हें फिर से बतौर पुरूस्कार मुख्य मंत्री के गृह जिले कबीर धाम का जिला कार्याक्रम प्रबंधक बना दिया गया.

अधिकारी का पत्र
अधिकारी का पत्र

बस्तर के स्वास्थ्य विभाग में ऐसे मामलों की कोई कमी नहीं है. एक और मामला सुकमा का है जहां राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन की पूर्व कार्याक्रम प्रबंधक डॉ अनिता पैकरा पर भी गंभीर आर्थिक अनियमितताओं का आरोप विधायक कवासी लखमा ने लगाया था. अनिता पैकरा पर भी लगे आरोप सही पाये गये. इस मामले में भी कार्यवाही करने की जगह तात्कालीन मिशन संचालक ने दिनांक 31/10/17 को जारी आदेश में लिखा कि डॉ. अनिता पैकरा जिला कार्यालय प्रबंधक द्वारा क्रय-विक्रय आदि कार्यो में अनियमितता बरतने का दोषी पाया गया है. आप को सुकमा में नवीन पदस्थापना के रूप में पदस्थ किया गया था. उक्त समय में सुकमा जिले में लेखा प्रबंधक हेतु कोई प्रशिक्षित एवं अनुभवी कर्मचारी पदस्थ नहीं था. इन परिस्थितियों के कारण आप पर ऐसी कोई गंभीर शास्ती आरोपित नहीं की जा रही है. आप ऐसे कृत्यों की पुनरावृत्ति दोबारा ना करें. इस तरह एक दोषी अधिकारी को फिर एक बार रायपुर में बैठे मिशन संचालक आर. प्रसन्ना ने उन्हें अभय दान दे दिया. स्वास्थ्य विभाग में ऐसे दर्जनों उदाहरण मौजूद है जहां भ्रष्टाचारियों को सजा ना देकर उन्हें और भी ज्यादा बेखौफ होकर भ्रष्टाचार करने की छुट दे दी गई है.

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