भाजपा को अपने गढ़ बचाने में छूट रहा पसीना

नई पार्टी बनाने से जोगी का अहम मुद्दा भाजपा से छिन गया

राफेल डील,नोटबंदी व पेट्रोल डीजल के बढ़े दाम भी भाजपा की मुश्किलें बढ़ा रहे है

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद हुए सभी विधानसभा चुनाव के साथ ही लोकसभा चुनाव में प्रदेश की जनता ने भाजपा का समर्थन किया, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपने इस मजबूत गढ़ को बचाने में पसीना छूट रहा है। भाजपा सरकार 15 सालों में किये गये विकास कार्यो को जनता तक बताने के लिए हर संभव कोशिश करने के बाद भी राज्य इन दिनों संघर्ष करती हुई नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह प्रदेश में सभा करके भाजपा की जीत सुनिश्चित करने में लगे है, लेकिन पन्द्रह सालों के बाद राजनीतिक परिस्थितियों बहुत बदल भी गयी है। पहली बार कांग्रेस जोगी के बगैर चुनाव लड़ रही है वही कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी जनता कांग्रेस जोगी बसपा के साथ गठबंधन करके पूरे प्रदेश भर में चुनाव लड़ रहे है। जिसके चलते भाजपा द्वारा हर चुनाव में कांग्रेस पर जोगी कार्यकाल के तीन साल का हवाला देने का मुद्दा अपने आप कमजोर पड़ गया है। वही दूसरी तरफ वर्तमान में केन्द्र में मोदी सरकार होने के कारण भाजपा कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए पुराने कार्यकाल के साथ ही परिवारवाद का आरोप लगा रही है,गौरतलब है कि पिछले दो चुनाव में केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी जिनकी नितियां व नक्सल मामले पर तालमेल की कमी के लिए कांग्रेस को निशाना भाजपा नेता बनाते रहे है। दुसरी तरफ कांग्रेस के पास राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के साथ ही केन्द्र सरकार के खिलाफ आरोप लगाने के कई मुद्दे होने से हालत बदले बदले नजर आ रहे है, राफेल विमान के मुद्दे के साथ ही सीबीआई व आरबीआई में हुआ विवाद भाजपा के लिए गले की हड्डी बन गया है वही नोटबंदी व पेट्रोल डीजल के बढ़े दामों को लेकर भी कांग्रेेस की तरफ से हमले बोले जा रहे है। उसी बीच केन्द्रिय मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को अपना मित्र करार देकर राजनीति को नई हवा दे दी, क्योकि कांग्रेस बसपा गठबंधन के बाद भी भाजपा व जोगी के बीच साठगंाठ का आरोप लगा रही थी, केन्द्रिय मंत्री के बयान से उसको हवा मिल गयी, इसी बीच अजीत जोगी का यह बयान आ गया कि अगर उनकी पार्टी को बहुमत नही मिलता है तो वह भाजपा के साथ जा सकते है ने स्थिति पूरी तरह से बदल दी है। चौथे विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की राजनीति हालत पूर्व तीन विधानसभा चुनाव से बिलकुल भी अलग है, जिसके कारण भाजपा को अपने गढ़ को बचाने के लिए बहुत पसीना बहना पड़ रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *