निर्दलीयों ने जगदलपुर विधानसभा सीट को रोमांचक बनाया

नोटा की भूमिका भी हो सकती है महत्वपूर्ण

जगदलपुर। गुटबाजी के चलते कांग्रेस केा लगातार हार का सामना करना पड़ रहा था लेकिन इस विधानसभा चुनाव में भाजपा इस बीमारी से बूरी तरह से ग्रसित दिखाई दी, जिसका फायदा विपक्षी दल कांग्रेस को मिलता नजर आया, जिसके चलते जगदलपुर विधानसभा सीट जो भाजपा की सुरक्षित सीट मानी जाती थी, वह एक रोमांचक मुकाबले में तब्दिल होना साबित करता है कि कांग्रेस की स्थिति में सुधार हुआ है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद जगदलपुर विधानसभा सीट पर हमेशा भाजपा का ही कब्जा रहा है, लेकिन इस चुनाव में ऊंट किस करवट बैठता है इसका फैसला तो 11 दिसंबर को ही होगा, क्योकि भाजपा व कांग्रेस दोनों ही प्रत्याशी अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे है,

जवानों के प्रति प्रशासन की अनदेखी
जवानों के प्रति प्रशासन की अनदेखी

लेकिन जीत व हार के समीकरण को बदलने की ताकत रखने वाले अन्य 20 प्रत्याशियों को कितना वोट मिलता है इस पर भी सभी की नजर है, राजनीतिक जानकार मानते है कि नोटा सहित अन्य 19 उम्मीदवारों को कितना वोट मिलता है यह ही हार व जीत को तय करेगा, क्योकि निर्दलीय प्रत्याशी कांग्रेस व भाजपा देानों के ही वोट कांट रहे थे, अहम सवाल यह है कि कौन किसका कितना वोट काटने में कामयाब हुआ है, इससे ही तय होगा कि जीत किसके खाते में जाती है लेकिन यह जरूर है कि जगदलपुर विधानसभा को निर्दलीयों ने एक रोमांचक मुकाबले में तब्दिल कर दिया है

बस्तर की जनता क्या दो बार देती है मौका?

बस्तर के कांग्रेस के बढ़त का आंकलन लगा रहे राजनीतिक जानकार
जगदलपुर। भाजपा राज्य में चौथी बार सरकार बनाने के लिए बस्तर पर विशेष ध्यान दिया, लेकिन चुनाव के बाद जो संकेत मिल रहे है वह यही साबित कर रहे है कि इस बार भी बस्तर की जनता ने भाजपा के साथ जाने की जगह कांग्रेस को साथ ही खड़ी है। जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बस्तर दौरे के बाद भी हालत में कोई उल्लेखनीय बदलाव नही आया।
बस्तर की जनता का मिजाज देश की जनता से अलग है यह बात पिछले विधानसभा चुनाव में ही साबित कर दी थी जब देश भाजपा ने नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री का दावेदार घोषित किया था, उस वक्त देश भर में उनका जादू चल रहा था लेकिन बस्तर में भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार करने के बाद भी बस्तर की 12 विधानसभा सीटों में भाजपा सिर्फ चार पर ही चुनाव जीत सकी थी, इस बार भी हालत में कोई बदलाव दिखाई नही दे रहा है जबकि भाजपा संगठन ने छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद बस्तर जो भाजपा के एक मजबूत किला बन गया था उसे वापस पाने के लिए हर संभव कोशिश करने के साथ ही आचार संहिता लगने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुनाव प्रचार करने के लिए बस्तर आये, लेकिन चुनाव के बाद जो संकेत मिल रहे है वह यही साबित कर रहे है कि बस्तर की जनता ने एक बार फिर कांग्रेस के साथ ही खड़ी है। बस्तर का चुनावी परिणाम आगामी विधानसभा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने की उम्मीद हर किसी को है, जो बस्तर फतेह करेगा उसी की ही राज्य में सरकार बनना तय माना जा रहा हैै। 11 दिसंबर को चुनावी परिणाम आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पायेगी लेकिन जो संकेत मिल रहे है वह यही बता रहे है कि इस बार भी बस्तर की जनता कांग्रेस का दामन नही छोड़ा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिस तरह से भाजपा के साथ बस्तर की जनता ने लगातार दो चुनाव जीताएं है उसी तरह ही कांग्रेस को भी दो चुनाव जीताने की तरफ बढ़ रही है।

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