160 किलोमीटर सफ़र तय कर, टीम पिलाती है दो बूँद ज़िन्दगी की…

नारायणपुर. छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अत्यंत नक्सली प्रभावित क्षेत्र अबूझमाडिया बच्चों को पल्स पोलियो की दवा पिलाने के लिए तीन अलग-अलग जिलों से पोलियो बूथ तक पहुंचना पड़ता है और एक ऐसा केंद्र है जहाँ दस बच्चों के लिए 25 किलोमीटर का सफ़र पैदल दूरी से तय करना पड़ता है. इस विषम परिस्थिति के बावजूद कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर इस राष्ट्रीय मिशन को आज पूरा किया. हालाँकि, दूरस्थ अंचलों में आने-जाने में कर्मचारियों को एक सप्ताह का समय लग जाता है.

नारायणपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आनंद राम गोटा ने बताया कि जिले में पल्स पोलियो के कुल 410 केंद्र बनाये गए हैं और 19 हज़ार 363 बच्चे हैं, वहीँ अबूझमाढ के ओरछा ब्लाक में 196 केंद्र बनाये गए हैं और 5 हज़ार 840 बच्चों को पल्स पोलियो की दवा पिलाई गयी है.

श्री गोटा का कहना है कि ओरछा ब्लाक के ग्राम लंका पहुँचने के लिए लगभग 150 किलोमीटर का सफ़र मोटरसाइकिल से तय करना पड़ता है और 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है. ग्राम डूगा पल्स पोलियो केंद्र में पहुँचने के लिए दंतेवाडा जिले से लगभग 160 किलोमीटर की दूरी तय कर मोटरसाइकिल से पहुंचना पड़ता है और 15 किलोमीटर से अधिक की दूरी बीहड़ वनक्षेत्रों के बीच से तय करनी होती है. ग्राम गोमे केंद्र तक पहुँचने के लिए कांकेर जिले से होकर 130 किलोमीटर तक का सफ़र तय कर 22 किलोमीटर तक की दूरी पैदल करनी होती है. उन्होंने बताया कि पल्स पुलिस केंद्र लंका में 30 बच्चे, गोमे में 39 बच्चे और डूमा में 76 बच्चों को पल्स पोलियो की दवा पिलाई गयी. इस इलाके में ऐसा पल्स पोलियो केंद्र है जो बीहड़ पहाड़ियों से 25 किलोमीटर दूर पैदल चलते हुए ओरछा ब्लाक के ग्राम कालेगुर पल्स पोलियो केंद्र तक पहुंचना पड़ता है. इसी तरह बेडमा पल्स पुलिस केंद्र में 19 बच्चों को दवा पिलाने के लिए 22 किलोमीटर का सफ़र तय करना पड़ता है.

उनका कहना है कि ओरछा ब्लाक का अबूझमाढ इलाका नक्सली प्रभावित होने के साथ ही साथ घना और पहाड़ी क्षेत्र है. पगडंडियों के माध्यम से विभिन्न पल्स पोलियो केंद्र में अपनी जान जोखिम में डालकर अबूझमाडिया बच्चों को दो बूँद ज़िन्दगी की पिला रहे हैं. दूरस्थ अंचलों में दवा पिलाने के लिए टीम को तीन दिन पहले रवाना किया जाता है और आने-जाने में एक सप्ताह का समय लग जाता है.

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