विधायक चुनाव पर पैनी नज़र

आज  प्रथम चरण की 18 सीटों पर मतदान है । इनमें से 12 सीटें कोर नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में पड़ती हैं जबकि आधा दर्जन सीटें असवेंदनशील  प्रभावित राजनांदगांव में हैं। इन 18 विधानसभा सीटों के लिए 4336 मतदान केंद्रों पर करीब 32 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर 190 प्रत्याशियों में से 18 विधायक चुनेंगे।

हाल के 15 दिनों में ही नक्सल वारदातों के चलते नौ जवान शहीद हो गए वहीं पांच सिविलयन को भी जान से हाथ धोना पड़ा।किन्तु आम बसबस्तरवासी  नक्सलवाद का पूरी हिम्मत से मुकाबला भी कर रहे।  शांत और खूबसूरत जिंदगी की चाहत के साथ अपने बच्चों के भविष्य के लिए बस्तरिया अब आवाज बुलंद करने लगे हैं, इससे नक्सलियों में घबड़ाहट भी है।

 

बस्तर के आदिवासियों, किसानों, श्रमिकों, युवाओं और महिलाओं को यह अच्छे से पता है कि यहां के चुनाव पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं। इसी संदर्भ में चुनाव आयोग ने भी यहां अधिकतम मतदान के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। आयोग द्वारा जहां कहीं भी आंशिक खतरा महसूस किया गया, उन जगहों से बूथों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया। इसके साथ ही मतदाताओं को जागरुक करने के लिए चुनाव आयोग ने कई कार्यक्रम चलाए। फोर्स ने भी यहां निर्भय व रिकार्ड मतदान के लिए मोर्चा संभाल रखा है। करीब 45 हजार जवान तैनात किए गए हैं सुरक्षा के लिए।

इन सबके बीच आज का दिन  एक नई इबारत लिखने का दिन है। सवाल इस बात का है ही नहीं कि कौन किसे वोट दे रहा है अथवा देना चाहता है। केवल यह है कि मतदान जरूर करें, वोट जरूर दें …चाहे जिसे वोट दें लेकिन दें जरूर। घर में न बैठें। कोई दूसरा काम, मतदान के बाद ही करें। आपका एक-एक वोट आपस में मिलकर वह मजबूत कड़ी बनाएगा

 

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