मेकाज में खुले में फेंका जा रहा वेस्ट मटेरियल

जगदलपुर. मेकाज हास्पिटल में मेडिकल वेस्टेज खुले में फेंका जा रहा है, इससे लोगों में संक्रमण का खतरा बना हुआ है. प्रबंधन ऐसा कर सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन का खुला उल्लघंन कर रहा है. असुरक्षित ढंग से कचरा फेंके जाने का खामियाजा आम जन को उठाना पड़ सकता है.

ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी जिला अस्पतालों व मेडिकल कालेजों में मेडिकल वेस्ट खुल में नहीं फेंकने तथा इसे सुरक्षित रूप से डिस्पोज करने संबधी गाइड लाइन जारी किया है. कोर्ट के आदेश का स्थानीय मेकाज हास्पिटल में पालन होना नजर नहीं आ रहा है. पूर्व में वार्डों से एकत्र कचरे को नर्सिंग हॉस्टल के पास खोदे गए गढ्ढे में डंप किया जाता था. वर्तमान में सफाई कर्मियों की लापरवाही के चलते खुले में ही दवाओं के खाली खोखे, शीशियां तथा अन्य कचरा सामग्री फेंक दिया जा रहा है. सीएस दफ्तर के पीछे खुले आसमान के नीचे कचरा पड़ा हुआ है, इसके चलते जहां आवारा मवेशियों की जान को खतरा है. वहीं गंभीर संक्रमण का भी खतरा संभावित है. मेकाज प्रबंधन का इस ओर ध्यान नहीं है.

गौरतलब है कि बीते वर्ष ही एक करोड़ की लागत से डिमरापाल स्थित मेकाज भवन में मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल यूनिट लगाया गया है, पर इसकी उपयोगिता समझ से परे है. वर्ष 1994 में देश की राजधानी में स्थित सफदरगंज हास्पिटल मैनेजमेंट के मेडिकल वेस्ट डंपिंग मामले में सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका डॉ व्हीएल वढ़ेरा ने दायर की थी. प्रकरण की सुनवाई करते न्यायालय ने देश के समस्त 50 बिस्तर व इससे अधिक की क्षमता वाले अस्पतालों में मेडिकल अपशिष्ट के निपटान प्रबंधन के लिए सुरक्षित व वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने के निर्देश दिए थे, साथ ही प्रदूषण बोर्ड को समय-समय पर इसकी निगरानी के लिए भी निर्देशित किया गया था.

अस्पताल अधीक्षक डॉ अविनश मेश्राम ने बताया है कि मेडिकल वेस्टेज के निपटान के लिए गढ्ढे में डंपिंग किए जाने के निर्देश दिए गए हैं. यदि खुले में कचरा फेंका गया है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी.

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