काल की गर्त में जाता बस्तर का बचपन…

पुलिस विभाग नकेल कसने की तैयारी में…

जगदलपुर (रवि राज). नशा… यह शब्द सुनते ही कई लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं… तो कई मदहोशी में झूम उठते हैं. जी हाँ, हम उसी नशे की बात कर रहे हैं जिसमे आज बस्तर का बचपन काल की गर्त में डूबता चला जा रहा है. छोटे-छोटे नाबालिक बच्चे इसका शिकार हो रहे हैं. अपने जीवन को संवारने की उम्र में ये बच्चे ऐसी नशे की आदतों में पड़ गए हैं जिससे उनका बाहर आ पाना लगभग नामुमकिन सा हो गया है.

ऐसे जहरीले और नशीले पदार्थों के सेवेन से ना सिर्फ परिवार अपितु पुरे समाज को इससे क्षति पहुँचती है. छोटी सी उम्र में जहाँ ऐसे नाबालिक बच्चों को खेल-कूद अथवा अपने पढाई पर ध्यान देना चाहिए, वे इस नरक में जाने से नहीं हिचकिचाते. बढती उम्र में बच्चे का मन, उसका दिमाग मोम की तरह होता है, ऐसे में दीमक की तरह मानसिक गहराईयों को चाटती ये नशीली गंदगी उनके मनोबल व दिमाग को धीरे-धीरे पिघलाने लगती है और बच्चा शनैः-शैनः अपना अस्तित्व खोने लगता है.

अगर हम सिर्फ जगदलपुर शहर की बात करें तो यहाँ के बच्चे आमतौर पर घर से यह कहकर निकलते हैं की दोस्तों के साथ खेलने जा रहे हैं… पर अमूमन यह किसी को नहीं पता होता की क्या वाकई ऐसे बच्चे खेलने ही जा रहे हैं या कहीं और…???

जगदलपुर शहर में शाम ढलते ही ऐसे कई स्थान हैं जहाँ आपको महज 10 वर्ष से लेकर 16-17 वर्ष तक के बच्चे व्हाइटनर, बोन्फिक्स, गांजा जैसे नशा करते मिल जायेंगे. उन अँधेरी गलियों में ऐसे बच्चों का बचपन भी अन्धकारमय होता जा रहा है. दुर्भाग्य की बात यह है की बच्चे और नौजवान इस प्रकार की लत को फैशन का नाम देते हैं. धीरे-धीरे जब नशा सर चढ़कर बोलने लगता है तब वे चोरी, मर्डर जैसी गैरकानूनी हरकतों को अंजाम देते हैं.

हाल ही में शहर के प्रियदर्शिनी इंदिरा स्टेडियम में कुछ लड़कों को बोन्फिक्स के साथ पकड़ा गया था, जिनकी उम्र 14-17 वर्ष के मध्य थी. जब उनसे पूछा गया की इसके लिए पैसे का इंतज़ाम कहाँ से करते हो तो उन्होंने साफ़ कहा की कहीं न कहीं से जुगाड़ कर लेते हैं अथवा दोस्तों से उधार लेकर काम चल जाता है, साथ ही साथ उन्होंने यह भी बताया की जो बोन्फिक्स बाज़ार में लगभग 15-17 रुपये की मिलती है, उन्हें नशे के नाम से 30-35 रुपये में खरीदनी पड़ती है. इन बच्चों के परिवारजनों से जब चर्चा किया गया तो उनका कहना था की हम भी चाहते हैं की ऐसी कोई व्यवस्था हो जिनसे इनके इस लत को छुड़ाया जा सके. इंदिरा स्टेडियम में ही कुछ दिनों पूर्व एक नाबालिक को कुछ युवतियों के साथ अश्लील हरकतें करते हुए पकड़ा गया था. बाद में पता चला की वो भी गांजे का आदतन था.

जब इन बच्चों से यह पूछा गया की उन्हें इसकी लत कैसे पड़ी… तो उनका जवाब महज इतना सा था की …. एक दोस्त ने आदत लगा दी… ??? इस जवाब ने सभी को हैरान करके रख दिया. क्युकी यह बात तो साफ़ हो चुकी थी की जगदलपुर व बस्तर को दीमक की तरह चट करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. अब भी वक़्त है… हम सब को मिलकर एक साथ इस खतरनाक स्थिति को जड़ से मिटने के लिए एकजुट होना होगा.

क्या कहते हैं डॉ. नवीन दुल्हनी ?

डॉ. दुल्हनी से जब हमने बात की तो उन्होंने कहा की इस प्रकार के नशे से तो हमेशा दूर ही रहना चाहिए. यह धीरे-धीरे पुरे शरीर की मांस-पेशियों को नुकसान पहुंचता है, नसों को कमजोर करता है और इससे दिमाग धीरे-धीरे सुन्न पड़ने लगता है जिसके फलस्वरूप बच्चा का मन खाने की और कम हो जाता है, हाथों में कम्पन्न होने लगती है, और धीरे-धीरे बच्चे का शरीर अन्दर से खोखला होने लगता है. इसे सही समय पर अगर रोका नहीं गया तो दवाइयों का असर भी शारीर पर कम होता है, जिसके फलस्वरूप छोटी-छोटी बिमारियों का इलाज़ करना भी मुश्किल हो सकता है और इलाज़ के अभाव में बच्चे की मौत भी हो सकती है.

क्या कहते हैं जिले के पुलिस अधीक्षक:

बस्तर जिले के पुलिस अधीक्षक आर. एन. दाश ने बताया की ऐसी लत जब पड़ती है तो बच्चे के साथ-साथ परिवार को और समाज को भी नुकसान पहुँचता है. शहर को इससे निजात दिलाने के लिए पुलिस प्रशासन कुछ इच्छुक गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर एक टीम बनाने की योजना बना रही है जिसमे जिले के डॉक्टर भी सम्मिलित होंगे, जिसके माध्यम से ऐसे नाबालिक बच्चों को पकड़ा जायेगा और प्रथम कड़ी में उनके अभिभावकों को बुलाकर समझाईश दी जाएगी और उसके पश्चात भी अगर कोई सुधार नहीं होता है, या बच्चा फिर से नशा करते पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ क़ानूनी कार्यवाही की जाएगी.

आम जनता और ख़ासतौर पर ऐसी सामग्रियों के विक्रेता दुकानदारों से अपील करते हुए श्री दाश ने बताया की बच्चे नादान होते हैं, उन्हें सही-गलत की पहचान नहीं होती. जब भी कोई बच्चा ऐसी सामग्री आपके पास खरीदने आता है तो उन्हें ये सोचकर देवें की वो बच्चा आपका भी हो सकता था ? एक लक्ष्मण रेखा हमेशा बनाकर रखें जिससे बच्चे ऐसी गर्त में ना जा सकें. अभिभावकों से अपील की गयी है की बच्चों को ऐसी लत से बचाएँ, उनपर निरंतर ध्यान रखें की वो कहाँ जाते हैं, क्या खाते-पीते हैं, किनसे मिलते हैं… इत्यादि…

इंदिरा स्टेडियम में पकड़ा गया नाबालिक
इंदिरा स्टेडियम में पकड़ा गया नाबालिक

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